नई दिल्ली, प्रेट्र : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह चिकित्सकीय गर्भपात (एमटीपी) कानून और इससे संबंधित नियमों की इस तरह व्याख्या करेगा जिससे विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच के भेदभाव को दूर किया जा सके ताकि 24 सप्ताह तक की गर्भवती को गर्भपात की अनुमति दी जा सके। साथ ही कहा कि एमटीपी नियमों के प्रविधानों को दुरुस्त करने (दुरुस्त की आवश्यकता है और वह त्यागी गई महिलाओं की एक अन्य श्रेणी को भी इसमें शामिल करना चाहेगा।


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह एमटीपी कानून की व्याख्या के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख रही है और इसमें वह अविवाहित महिला या एकल महिला को 24 सप्ताह तक के गर्भ को गिराने की अनुमति में शामिल करेगी। केंद्र सरकार ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून में कोई भेदभाव नहीं है और अगर अदालत हस्तक्षेप करना चाहती है तो उसे एमटीपी नियम, 2003 में ऐसा करना चाहिए। केंद्र की ओर से पेश और इस मुद्दे पर अदालत की सहायता कर रहीं एडिशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी ने कहा कि एमटीपी (संशोधन) अधिनियम 2021 के तहत कोई भेदभाव नहीं किया गया है वर्गीकरण, अधिनियम के तहत संबंधित नियमों में किया गया है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर विशेषज्ञों के अपने विचार हैं और उनके अनुसार भ्रूण के लिंग निर्धारण के कारण गर्भधारण-पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी- पीएनडीटी) कानून सहित विभिन्न कानूनों के दुरुपयोग से बचने के लिए वर्गीकरण किया गया है। इस पर अदालत ने कहा, 'एक बात हमें स्पष्ट कर देनी चाहिए कि हम अपने फैसले का मसौदा इस तरह से तैयार करने जा रहे हैं कि हम पीसी-पीएनडीटी कानून के प्रविधानों को कमजोर नहीं करेंगे।' इससे पहले पांच अगस्त को अदालत ने कहा था कि वह एमटीपी कानून और संबंधित नियमों की व्याख्या करेगा ताकि यह तय किया जा सके कि क्या चिकित्सकीय सलाह पर अविवाहित महिलाओं को भी 24 सप्ताह के गर्भ को गिराने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं 

क्या गारंटी है कि आयुर्वेद हर बीमारी को ठीक कर देगा

नई दिल्ली, आइएएनएस : सुप्रीम कोर्ट ने कोविड - 19 के दौरान एलोपैथी और इसके माध्यम से उपचार करने वाले चिकित्सकों को बदनाम करने के प्रयासों पर बाबा रामदेव की खिंचाई की और केंद्र से उन्हें रोकने के लिए कहा। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि आयुर्वेद सभी बीमारियों का इलाज कर देगा। चीफ जस्टिस एनवी रमना, | जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रवि कुमार की खंडपीठ ने कहा, ‘बाबा रामदेव एलोपैथी चिकित्सकों पर क्यों आरोप लगा रहे हैं? वे योगा को लोकप्रिय बनाने में जुटे हैं, यह अच्छी बात है लेकिन उन्हें उपचार की अन्य विधियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए।' मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह डाक्टरों पर इस तरह आरोप लगा रहे हैं मानो वे हत्यारे हों।



 

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