विवाद बढ़ा तो बिल्डर को बेच दिया गर्ल्स कॉलेज

प्रयागराज। प्रदेश सरकार से सहायता प्राप्त इंडियन गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबंधन ने नियम विरुद्ध तरीके से बिल्डर को स्कूल ही बेच दिया। पिछले चार सालों से चले आ रहे विवाद के बीच प्रबंधन ने पिछले साल दो जून को एक कंस्ट्रक्शन फर्म को 60 हजार रुपये सालाना पर 30 सालों के लिए स्कूल का भवन और जमीन लीज पर दे दी।
सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1960 के प्रावधानों के भी सोसाइटी का क्रय-विक्रय या भू-उपयोग में परिवर्तन सक्षम भू न्यायालय या रजिस्ट्रार की अनुमति के बिना नहीं हो सकता। यह लीज sts औचित्यहीन है।

प्रबंधक प्रदीप कुमार चटर्जी ने पट्टा विलेख (लीज डीड) में लिखा है कि सम्पत्ति की सुरक्षा,मरम्मत और सरकारी देय का भुगतान करने के लिए उन्हें रुपयों की सख्त आवश्यकता है। कंस्ट्रक्शन फर्म को भूमि पट्टे पर देने के सिवा कहीं से रुपये मिलने की कोई दूसरी सूरत दिखाई नहीं दे rahi hai लिहाजा प्रबंध समिति की 21जून 2020 को हुई बैठक में स्कूल की भूमि को पट्टा पर देने का निर्णय लिया गया है। इस पूरे प्रकरण में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय के क्लर्क रामकृष्ण मिश्रा की भूमिका भी संदिग्ध है। रामकृष्ण की पत्नी शंकुतला देवी स्कूल प्रबंध समिति की आजीवन सदस्य हैं। 
कॉलेज में तमाम अनियमितताओं के मद्देनजर शासन ने कॉलेज के प्रबंधतंत्र को भंग करते हुए 15 जुलाई को एसडीएम सदर को प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त किया है।

134साल पुराना कॉलेज


चार साल से चले आ रहे विवाद के कारण शहर के प्रतिष्ठित और सबसे पुराने गर्ल्स कॉलेज में से एक इंडियन गर्ल्स स्कूल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस स्कूल की शुरुआत 1888 में मोहत्सिमगंज से हुई थी और वर्तमान बिल्डिंग में यह 1931 में आया। 

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