किसानों को आगे भी सस्ती दरों पर मिलता रहेगा कर्ज 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने छोटी अवधि के तीन लाख तक के कृषि ऋण पर ब्याज में 1.5 प्रतिशत की सबवेंशन योजना को फिर बहाल करने की मंजूरी दे दी है। इससे किसानों को कम दर पर ऋण मिलने का रास्ता साफ हो गया है। कैबिनेट के इस फैसले का बैंक और वित्तीय संस्थानों पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।


सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-2024 के लिए सरकार की ओर से यह मदद दी जाएगी। इसके लिए सरकार को बजट में अतिरिक्त 34,856 करोड़ का प्रविधान करना होगा। ठाकुर ने कहा कि मई, 2020 में व्याज सबवेंशन योजना को रोक दिया गया था, क्योंकि बैंक स्वयं सात प्रतिशत पर अल्पकालिक कृषि ऋण प्रदान करने में सक्षम थे। आरबीआइ द्वारा रेपो दर में तीन बार में 140 आधार अंकों की वृद्धि करने के बाद बैंकों को क्षतिपूर्ति करना आवश्यक है, जिससे कि वे सात प्रतिशत पर कृषि ऋण देना जारी रख सकें। उधर,कैबिनेट ने अंतरराष्ट्रीय परिवहन मंच (आइटीएफ) की देश के परिवहन क्षेत्र में गतिविधियों को समर्थन देने के लिए भारत-फ्रांस के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है।

हास्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए बिना गारंटी 50,000 करोड़ का लोन

Nayi दिल्ली: कोरोना से प्रभावित हास्पिटैलिटी सेक्टर को सरकार ने बिना किसी गारंटी के 50,000 करोड़ रुपये का लोन देने का फैसला किया है। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के तहत ये लोन दिए जाएंगे। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक उद्यमी अगले साल 31 मार्च तक इस स्कीम के तहत लोन ले सकेंगे। हालांकि ईसीएलजीएस स्कीम पहले से चल रही है और इसके तहत अब तक 3.67 लाख करोड़ रुपये के लोन की मंजूरी दी जा चुकी है। वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार ने ईसीएलजीएस के तहत एमएसएमई को बिना किसी गारंटी के लोन देने का फैसला किया था। उस समय ईसीएलजीएस के तहत तीन लाख करोड़ रुपये का फंड दिया गया था। बाद में इस स्कीम के फंड में और 1.5 लाख करोड रुपये आवंटित किए गए थे। अब ईसीएलजीएस का फंड पांच लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।

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