भारत के लिए रूस से तेल सौदा सर्वश्रेष्ठ, वही कर रहे : जयशंकर

रूस से तेल खरीदने के फैसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, अपने लोगों को सर्वश्रेष्ठ सौदा उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। हम वही कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देश भले हमारे इस फैसले की सराहना न करें, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। क्योंकि भारत ने कभी इस रुख का बचाव नहीं किया।


भारत- थाईलैंड संयुक्त आयोग की 9वीं बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे जयशंकर ने कहा, हमने दुनिया को एहसास दिलाया है कि तेल एवं गैस की अनुचित रूप से अधिक कीमतों के बीच सरकार का अपने लोगों के प्रति क्या दायित्व है। उन्होंने वहां भारतीयों से मुलाकात करते हुए कहा, भारत के कई आपूर्तिकर्ताओं ने अब यूरोप को आपूर्ति करना शुरू कर दिया है, जो रूस से कम तेल खरीद रहा है। तेल की कीमत अनुचित रूप से अधिक हैं और यही हाल गैस की कीमत का है। हमारे देश में प्रति व्यक्ति आय दो हजार डॉलर है। आम लोग ऊर्जा की अत्यधिक कीमत को वहन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, भारत को सर्वश्रेष्ठ सौदा मिले यह सुनिश्चित करना यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व एवं नैतिक कर्तव्य है।

एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, आज स्थिति ऐसी है कि हर देश कोशिश करेगा कि ऊंची कीमतों का असर झेल सके और हम यही कर रहे हैं। भारत रक्षात्मक तरीके से ऐसा नहीं कर रहा है। भारत ने पश्चिमी देशों की आलोचना के बावजूद रूस से तेल आयात बढ़ाया है और उसके साथ व्यापार जारी रखा है।

दुनिया के अन्य देशों के सवाल पर बोले, वे सब समझते हैं

रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर पड़ने वाले असर के सवाल पर जयशंकर ने कहा, मुझे लगता है कि न केवल अमेरिका बल्कि सभी देश समझते हैं कि हमारी क्या स्थिति है और वे इस बारे में अब आगे बढ़ चुके हैं। जब आप खुलकर और ईमानदारी से अपनी बात रखते हैं, तो लोग उसे स्वीकार कर लेते हैं।

चीनी जहाज पर बोले, पड़ोस में हो रही हर हरकत पर नजर

जयशंकर ने चीनी जासूसी जहाज पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि पड़ोस में हो रही हर हरकत पर हमारी नजर है। हम अपनी सुरक्षा पर हर खतरे को लेकर बेहद सतर्क नजर रख रहे hai.

उत्तरी सीमा पर चुनौतीपूर्ण स्थिति :

जयशंकर ने भारत के समक्ष मौजूद विभिन्न चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, हमने लंबे समय तक सीमा पार आतंकवाद के असर की चुनौती झेली है। पिछले दो साल में हमारी उत्तरी सीमा पर भी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। उत्तरी सीमा पर एक ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जो भारत की उसके उत्तरी पड़ोसी चीन के साथ आपसी समझ के खिलाफ है। उन्होंने कहा, इसके अलावा भी वैश्विक महामारी, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा जैसे कई मामले हैं, जो भारत को प्रभावित करते हैं।

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