प्रयागराज, संवाददाता। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षा के दौरान पहली बार वेब कास्टिंग की व्यवस्था की गई थी। सभी केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। विश्वविद्यालय के कंट्रोल रूम से नजर रखी गई थी। कंट्रोल रूम में देखा गया था कि कई सेंटरों पर छात्र ब्लैकबोर्ड की ओर देखकर लिख रहे हैं। ब्लैक बोर्ड की तरफ सीसीटीवी कैमरे नहीं थे इसलिए सामूहिक नकल की आशंका जताई गई थी। विवि प्रशासन ने परीक्षा के दौरान ऐसे केंद्रों को चिह्नित कर लिया था।


मूल्यांकन शुरू हुआ तो इन संदिग्ध केंद्रों की कॉपियों का मूल्यांकन अलग से करवाया गया। आशंका सही साबित हुई ज्यादातर कॉपियों में एक-एक शब्द और वाक्य मिल रहे थे। यहां तक कि गलतियां भी एक जैसी ही थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामूहिक नकल के आरोपी स्नातक अंतिम वर्ष के 9849 छात्र-छात्राओं को एक वर्ष के लिए डिबार कर दिया है। इनमें सर्वाधिक 8573 बीएससी, 1075 बीए और 201 बीकॉम के परीक्षार्थी हैं। अभी स्नातक प्रथम व द्वितीय वर्ष की कॉपियों का मूल्यांकन चल रहा है। जिन केंद्रों के अंतिम वर्ष के छात्रों को डिबार किया है उन केंद्रों के प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों की कॉपियों का मूल्यांकन भी अलग से करवाया जा रहा है। माना जा रहा है प्रथम और द्वितीय वर्ष के हजारों छात्रों पर भी डिबार की कार्रवाई होगी।

परिणाम के बाद कॉलेजों पर भी कसेगा शिकंजा


जानकारों के मुताबिक मंडल के चारों जिलों के चार दर्जन से ज्यादा कॉलेजों के छात्रों को सामूहिक नकल के आरोप में डिबार किया गया है। स्नातक के तीनों वर्षो का परिणाम घोषित होने के बाद इन कॉलेजों पर भी सख्त कार्यवाही करने की तैयारी है। इनकी करतूत सीसीटीवी कैमरे में कैद है। बता दें कि राज्य विश्वविद्यालय ने सत्र 2021-22 की स्नातक तृतीय वर्ष के 9849 परीक्षार्थियों को एक साल के लिए डिबार कर दिया है। ये परीक्षार्थी फिर से प्रवेश लेंगे और सत्र 2022-23 की स्नातक तृतीय वर्ष की परीक्षा में शामिल होंगे। राज्य विश्वविद्यालय की ओर से अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। राज्य विश्वविद्यालय से प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर में कुल 653 संघटक महाविद्यालय जुड़े हैं, जिनमें तकरीबन सवा चार लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं।

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