क्रेडिट कार्ड से उधार लेकर खर्च करने से अब बचने लगे ग्राहक

अपने देश में उधार लेकर 'घी पीने' की प्रवृत्ति काफी कम है। इसी का नतीजा है कि क्रेडिट कार्ड से होने वाला लेनदेन करीब करीब डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन के बराबर है। बैंकों और विभिन्न वित्तीय संस्थाओं द्वारा ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्क को लेकर आरबीआई ने पहली बार राय जानने की पहल की है। बैंकिंग लोकपाल की रिपोर्ट में पिछले साल आई कुल शिकायतों में एक तिहाई शिकायतें ऐसे ही शुल्क को लेकर हैं। आरबीआई ने बुधवार को इस संबंध में 25 पेज का परिपत्र जारी किया गया है। क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर ग्राहकों से एमडीआर यानी मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट वसूला जाता है। इस शुल्क का बंटवारा डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक, दुकानों में पीओएसयानी प्वाइंट आफ सेल्स मशीन जारी करने वाले बैंक और सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर के बीच होता है।

कोरोना काल में इस्तेमाल बढ़ा


कोरोना काल में लोगों ने क्रेडिट कार्ड का धड़ल्ले से उपयोग किया। अकेले कानपुर में क्रेडिट कार्ड से लगभग 650 करोड़ खर्च किए पर कोविड काल से उबरते ही क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल घट गया। इस साल छह महीने में महज 125 करोड़ रुपए क्रेडिट कार्ड से निकले हैं।

शुल्क को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें


आरबीआई के मुताबिक अभी तक यूपीआई लेनदेन के शुल्क के संबंध में निर्देश जारी नहीं किए हैं। यूपीआई लेनदेन के लिए जीरो फीस सिस्टम तैयार किया है। एक यूपीआई को पूरा करने की प्रक्रिया में लगभग 800 खर्च आता है। बैंकिंग लोकपाल में बैंकों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्क की शिकायतें 44 हजार से ज्यादा हैं, जो अन्य किसी मद में शिकायतों में सर्वाधिक हैं।

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से लेन-देन बराबर

आरबीआई के मुताबिक 22 मई 2022 तक डेबिट कार्ड के 92 करोड़ और क्रेडिट कार्ड के 7.5 करोड़ ग्राहक थे। आमतौर पर डेबिट कार्ड की तुलना में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल 20 गुना तक ज्यादा होता है पर यहां दोनों कार्ड से लेनदेन लगभर बराबर है।

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