वाराणसी, प्रमुख संवाददाता । आईआईटी बीएचयू के आई डीएपीटी हब फाउंडेशन की ओर से स्टार्ट-अप हब पिच के मेगा फाइनल का पहला दौर सोमवार को पूरा हुआ। इस दौर में देशभर की 24 टीमों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। पहले दिन मधुमेह को नियंत्रित करने और गुर्दे को सक्रिय बनाए रखने के लिए ऑप्टिकल सेंसर, सौर फोटोवोल्टिक, आईओटी सक्षम डीसी एसी स्मार्ट ग्रिड, कम हवा की गति पर पवन ऊर्जा का उपयोग करने के लिए पवन वृक्ष तकनीक का प्रदर्शन किया गया।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, शहरी गतिशीलता, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक सिस्टम, मोबाइल एप्लिकेशन, रोबोटिक्स से सबंधित प्रोटोटाइप भी ज्यूरी के समक्ष प्रदर्शित किए गए। बिजली, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, दूरसंचार, सड़क परिवहन और राजमार्ग से संबंधित क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित उत्पादों अथवा प्रोटोटाइप का प्रदर्शन मेगा फाइनल के दूसरे दिन 23 अगस्त को किया जाएगा। विजेता और उपविजेता को 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा। साथ ही आई डीएपीटी हब फाउंडेशन की ऊष्मायन प्रक्रिया के स्क्रीनिंग राउंड में सीधे प्रवेश मिलेगा। हब पिच के अतिरिक्त स्टार्ट-अप स्ट्रीट नाम से प्रदर्शनी भी लगाई गई। हालांकि पहले दिन स्टार्ट-अप स्ट्रीट में सन्नाटा पसरा रहा। 24 में से सिर्फ दो स्टाल ही थे जहां थोड़ी चहल पहल दिख रही थी। कई स्टाल तो ऐसे थे जिनपर न तो आगत ही थे न ही मेजबान ।

फाइनल राउंड के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से आने वाली पीढ़ी समाज में व्याप्त गंभीर समस्याओं के प्रति विश्लेषणात्मक रूप से सोचना सीखेगी। आईआईटी बीएचयू के डीन डॉ. विकास कुमार दुबे ने बताया कि आईओटी आधारित इंटेलिजेंट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम सेंसिंग, इंटरेक्शन मॉडलिंग और चिकित्सा उपकरणों के लिए नियंत्रण डिजाइन पर भी इंटरेक्टिव सत्र आयोजित किए गए। आई डीएपीटी हब फाउंडेशन के समन्वयक डॉ. आरके सिंह ने उल्लेख किया कि ज्यूरी सदस्यों द्वारा प्रतिभागियों को नवाचार, प्रौद्योगिकी व्यवहार, सामाजिक प्रभाव, मापनीयता आदि कड़े मापदंडों पर आंका जा रहा है।

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