अनुच्छेद 370 हटने और जन प्रतिनिधित्व कानून लागू होने से मिलेगी सुविधा 

जम्मू / श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर से


अनुच्छेद 370 हटने और जन प्रतिनिधित्व कानून (आरपीए) लागू होने के बाद कोई भी सामान्य भारतीय वहां मतदाता सूची में नाम दर्ज करा सकता है। शर्त बस इतनी है कि पहले जहां उसका नाम दर्ज था, उस सूची से उसका नाम हटा दिया गया हो। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि यह ऐसा ही है जैसे बिहार का कोई व्यक्ति यदि उत्तर प्रदेश में रह रहा है, तो वहां का मतदाता बन सकता है।


चुनाव आयोग ने बुधवार को घोषणा की थी कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद दूसरे राज्य के लोग भी जम्मू कश्मीर में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान में नाम जुड़वा सकेंगे। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी हृदयेश कुमार ने कहा, इसके लिए व्यक्ति का जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी होना जरूरी नहीं है। इस घोषणा के बाद यहां रह रहे दूसरे राज्यों के निवासी, पदस्थापित. आयोग ने विशेष पुनरीक्षण के बाद जम्मू-कश्मीर में 20 से 25 लाख नए मतदाता शामिल होने की उम्मीद जाहिर की है। इसमें बड़ी संख्या 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं की होगी। इससे मतदाताओं की संख्या 76 लाख से बढ़कर एक करोड़ से ज्यादा हो जाएगी।

प्रवासी कर्मचारी और सैनिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के पात्र हो सकेंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया जम्मू-कश्मीर में जब 370 लागू था, तब भी वहां अस्थायी रूप से रह रहे बाहरी लोग  मतदाता सूची में शामिल होने के पात्र थे। इन्हें गैर-स्थायी निवासी मतदाता की सूची में रखा जाता था और पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में ऐसे मतदाताओं की संख्या 32 हजार के करीब थी।

आयोग के फैसले का स्वागत


आयोग के निर्णय का स्वागत है, अगर दिल्ली में वहां मजदूरी करने वालों को वोट देने का हक है, तो यहां काम करने वाले लोग यहां वोट क्यों नहीं दे सकते।

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